हमने देखा है!
ज़िन्दगी को हमने हकीकत के आइने में ढलते देखा है, अपनों को अपनों से वक्त के साथ बदलते देखा है, गुरूर था उन्हें जिन ज़ज़्बातों पर, उनहीं ज़ज़्बातों को हमने वज़ूद खोते देखा है। जिन नज़रों में कभी प्यार झलकता था, आज उन नज़रों को ही बदलते देखा है, आज हमने भी एक ज़िन्दगी से, एक ज़िन्दगी को अकेले लड़ते देखा है। न पूछा कभी और न कभी जाना, फिर भी हर पल शिकायत करते देखा है, बस कुछ वक्त के लिये हम गुम क्या हुये, हमने हर रिश्ते को मुंह मोड़ते देखा है। आसान नहीं हर पल बिखर के यूं सिमट जाना, हमने पहाड़ों को आसमान से लड़ते देखा है। ख्वाहिश तू किसी बात का गम न कर, हमने हर गिरने वाले को संभलते देखा है।

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